परिचय


पहचान :
यदि आप मेरी पहचान चाहते हैं तो मैं इतना हि कहुंगी कि ,
 इस कवि जगत में मैं तो एक नव अन्कुर की तरह  हूं
 जो इस नवीन , सुन्दर , भावनत्मक एवं कव्यातम्क प्रपंच का
 अवलोकन करने अपने बीज से फूट कर बाहर आया है । 
जिसे आपके अनमोल विचरों से सिंचे जाने कि जरूरत है।
 ताकि मैं इस "पहचान " को आगे बढा कर अपनी पहचान को पहचान दे सकूं ।

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