प्रेरणा


प्रेरणा :

प्रेरणा तो वह स्त्रोत है जो मानव में छिपि कला को जाग्रुत करती है । 
मेरे अन्तर मन में सदैव भवनाओं की नदियां बहती रहती है ।
 जब भी किसी नदी में बाढ आती है अर्थात जब भी मेरा मन
 किसी भी घटना से प्रेरित या प्रभावित होता है तो ,
 तो वह अन्तर मन से निकल कर कोरे पन्नों पर लिपिबद्ध हो जाता है ।
मेरी प्रेरणा का स्त्रोत अधिकतर समाज ही रहा है ..........

	मैंने आज तक समाज कि घटनाओं से प्रेरित होकर हमेशा कुछ न कुछ लिखने का प्रयास किया है ।
 और आज मैं अपनी "पहचान " के द्वारा उन बीते पलों को बांटने चली हूं ।
आशा है कि मेरी "पहचान " मुझे इस कवि जगत मैं पहचान जरूर देगी इस आशा से..........

                                               			आपकी

                                                  शर्मि
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